गणेश चतुर्थी
गणपति बप्पा मोरया , प्रकट दिवस यह आय ।
सुबह शाम सब आपको , मोदक देय खिलाय ।।
मोदक देय खिलाय , सभी के ज्ञान-भंडार ।
ऐसे भर दो नाथ , बढ़ जाएं कारोबार ।।
कह 'वाणी' कविराज , चमकाय चप्पा-चप्पा ।
दस दिन बाजे-ढोल , रात-दिन गणपति बप्पा ।।
गणेश चतुर्थी
गणपति बप्पा मोरया , प्रकट दिवस यह आय ।
सुबह शाम सब आपको , मोदक देय खिलाय ।।
मोदक देय खिलाय , सभी के ज्ञान-भंडार ।
ऐसे भर दो नाथ , बढ़ जाएं कारोबार ।।
कह 'वाणी' कविराज , चमकाय चप्पा-चप्पा ।
दस दिन बाजे-ढोल , रात-दिन गणपति बप्पा ।।
हजारी प्रसाद द्विवेदी
अनमोल कहे लाल जी , ज्योतिष्मति बुलाय ।
संस्कृत-ज्योतिष सीख के , ऐसी कलम चलाय ।।
ऐसी कलम चलाय , रच बाण भट्ट की कथा ।
पद्म भूषण दिलाय , कुटज,कबीर, कल्पलता ।।
दे हजारी प्रसाद , सब ज्ञान खज़ाने खोल ।
'वाणी' लाखों आज , ढूंढ़े मोती अनमोल ।।
वे यादें ताजा करें , हॅंस-हॅंस सबके बीच ।।
हॅंस-हॅंस सबके बीच , जोसेफ नाईस फोर ।
थे वैज्ञानिक फ्रांस , आविष्कार कर बिफोर ।।
कह 'वाणी' कविराज , कौन जीए या कि मरे ।
अमर करे सब नाम , लाखों के ये कैमरे ।।
सोच-समझ कर बोलना , बढ़ें सफलता लीक ।।
बढ़ें सफलता लीक , सुन-सुन अनुभव खज़ाने ।
मुसीबतों के तोड़ , सभी पल-पल में जाने ।।
कह 'वाणी' कविराज , सारा ही जग जान ले ।
ये माथे के मोड़ , बातें प्यारी मान लें ।।